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आखिर दिन भर करते क्या है जूनियर इंजीनियर

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लखनऊ। राजधानी के हर जोन में अवैध बिल्डिंगों की भरमार है, अधिकारियों और इंजीनियरों की भी लंबी फौज है। सुबह समय से ही अधिकारी अपने-अपने दफ्तर में भी दिखते हैं, सुबह 10:30 बजे से ही छापा मारने और निरीक्षण करने प्रवर्तन दल के लोग भी निकल जाते हैं, लेकिन शाम तक होता कुछ नहीं है। एक नोटिस काटने में भी इंजीनियरों के हाथ कांपते हैं, अवैध बिल्डिंग पूरी करने और सारे स्लैब पड़वाने के बाद भी वह कहते हैं कि धारा-16 की कार्रवाई अभी नहीं कर पाएंगे, जब अवैध बिल्डिंग में उसकी दुकान सज जाएगी, तब धारा-16 की कार्रवाई करेंगे, लेकिन जब उसकी दुकान सज़ जाती है, तब कहते हैं, वह तो बहुत पुरानी अवैध बिल्डिंग है, अब उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
 लखनऊ विकास प्राधिकरण कई वर्षों से अवैध बिल्डिंग बनवाने और उसे आगे चलते रहने देने के लिए विख्यात है। अलीगंज सेक्टर डी में एमएस-102 की मनहूस बिल्डिंग ने 15 युवाओं को लील लिया हो, लेकिन अधिकारियों के माथे पर कोई पसीना नहीं है। उनके हालात में कोई फर्क नहीं है, पॉलिटिकल पार्टियों ने अलीगंज की अवैध बिल्डिंग को मुद्दा बना लिया है। 15 युवाओं की जान उनके लिए बड़ी चीज थी, लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण के लिए यह कोई बड़ी चीज नहीं है, अगर उसके लिए बड़ी चीज होती तो सेक्टर डी की इस बिल्डिंग की लाइन में ही 14 और अवैध बिल्डिंग खड़ी है, बेसमेंट में दुकान हैं, रेस्टोरेंट है, हॉस्पिटल है लेकिन वह उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इसी सड़क पर आधा दर्जन नई बिल्डिंग भी बन रही है लेकिन उनमें भी कोई नियम लागू नहीं किया जा रहा है। अब जब जोन-4  में इतना बड़ा कांड हुआ, जो पूरे देश भर के लिए हिलोरे मारने वाला था, जब उस जोन के लोग ही नहीं सुधरे तो बाकी के जोन के इंजीनियर से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं। गोमती नगर के पत्रकारपुरम इलाके में बेसमेंट में बच्चों का अस्पताल चल रहा है, बेसमेंट में ही मानसिक मंदित बच्चे भी पढ़ रहे हैं, लेकिन जूनियर इंजीनियर विपिन बिहारी राय और जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। कई मामलों में जोनल अधिकारियों ने आदेश तो त्वरित दिया लेकिन उसको करने के लिए लगाई गई फौज सिर्फ वसूल कर वापस चली आई। जोन- पांच में 60 फीटा रोड जानकीपुरम में दो प्लाट को जोड़कर श्रीमती ज्योति गुप्ता और उनके पति राजेश गुप्ता अवैध मिठाई की दुकान महापदम स्वीट्स बनाकर बैठे हुए हैं और उसके ऊपर 200 ग्राहकों के लिए अवैध बैंक्वेट हॉल मनम्मा बना रहे है, शिकायत हुई तत्कालीन जोनल अधिकारी वंदना पांडे ने कोई कार्रवाई नहीं की, अब यह जिम्मेदारी रवि नंदन सिंह पर आ गई है, लेकिन वह भी एक हफ्ते में ही जूनियर इंजीनियर आलोक पति त्रिपाठी से कोई कार्रवाई नहीं करवा पा रहे हैं। भगवान ना करें कल को रेस्टोरेंट में आग लग जाय तो 200 आदमी की जान सांसत में फंस जाएगी, लेकिन अधिकारियों को एक महीने पहले हुआ अलीगंज का वह कांड सब भूल गया। सब कुछ अपने ढर्रे पर चलाने लगे, पत्रकारपुरम चौराहे और उसके आसपास भीड़ बढ़ाने के सबसे बड़े जिम्मेदार जोन एक के इंजीनियर और सुपरवाइजर हैं लेकिन वह सारा ठीकरा यातायात पुलिस पर फोड़ते हैं, अगर कार्रवाई करते भी हैं तो वह बिल्डर के खिलाफ थाने में मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराते?लेकिन नहीं वह सिर्फ सुविधा शुल्क वसूलने के लिए ही ना तो होटल के बेसमेंट में चल रहे अवैध निर्माण को तोड़ रहे हैं और ना ही मुकदमा दर्ज कर रहे हैं। अवैध निर्माण के पकड़े जाने पर मुकदमा दर्ज इसलिए नहीं करते हैं जिससे की सारी बागडोर इंजीनियरों के हाथ रहे और ज्यादा से ज्यादा वसूली कर सके। अलीगंज से लेकर चौक ठाकुरगंज और आलमबाग तक सब कहीं अवैध बिल्डिंग की शिकायत पर कोई नोटिस ही नहीं फाड़ते हैं।


 अलीगंज, महानगर में अवैध बिल्डिंगों की भरमार 

लखनऊ। हादसे के बाद अलीगंज में कोई सुधार नहीं आया है। जोनल अधिकारी माधवेश कुमार के संरक्षण में जांबाज जूनियर इंजीनियर ओमपाल सिंह और राम चौहान अवैध बिल्डिंग बनवाने के काम में जुटे हुए हैं। नेहरू बाल वाटिका से कपूरथला की सहारा इंडिया बिल्डिंग को जाने वाली सड़क पर चार नए निर्माण शुरू हो चुके हैं। एक पर तो सभासद पृथ्वी गुप्ता ने अपना ही बोर्ड लगा रखा है तो बाकी अन्य पर जूनियर इंजीनियर की छत्रछाया है। एलडीए के जोन 4 में जहां अग्निकांड वाली बिल्डिंग टूट रही है, उससे कुछ कदम की दूरी पर ही स्थित अलकापुरी चौराहे से बिल्डिंग तक आवासीय भूखंड पर चल रही व्यवसायिक गतिविधियां में से एक बिल्डिंग निलंबित एई अनिल कुमार और अम्बरीश शर्मा के समय ही बनी है। और तो और नेहरू बाल वाटिका चौराहे के आगे और राधेलाल मिठाई की दुकान के पहले बी-59/बी2 पार्ट सेक्टर बी में बन रही इस अवैध बिल्डिंग में बिजली के तार से कभी भी आग लगने या करंट से कोई दुर्घटना होने की संभावना भी बनी हुई है। अभी बिल्डिंग कंप्लीट नहीं हुई लेकिन बेसमेंट में और फर्स्ट फ्लोर पर वृद्धि इंटरप्राइजेज समेत अन्य दुकानें सज गई हैं। लेकिन इसके बावजूद अधिकारी एयर कंडीशन कमरा नहीं छोड़ रहे हैं और इंजीनियर अपनी वसूली का धंधा नहीं छोड़ रहे हैं।

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